दोनों स्वरूपों में देयता मौलिक रूप से भिन्न होती है।
साधारण साझेदारी में: साझेदार कंपनी के दायित्वों के लिए अपनी समस्त संपत्तियों में व्यक्तिगत एवं संयुक्त रूप से उत्तरदायी होते हैं, और इसके विपरीत कोई भी करार शून्य होगा (अनु. 33)। कंपनी के लेनदार कंपनी की संपत्तियों से तथा किसी भी साझेदार की व्यक्तिगत संपत्तियों से वसूली कर सकते हैं, परंतु किसी साझेदार की व्यक्तिगत संपत्ति के विरुद्ध निष्पादन तभी अनुमत है जब कंपनी को भुगतान हेतु सूचित किया गया हो और पंद्रह दिन बिना भुगतान के व्यतीत हो गए हों (अनु. 53)। नया सम्मिलित साझेदार सम्मिलन के पश्चात उत्पन्न दायित्वों के लिए उत्तरदायी होता है, और निवर्तमान साझेदार उन दायित्वों के लिए उत्तरदायी रहता है जो उसकी वापसी के पंजीकरण से पूर्व उत्पन्न हुए थे (अनु. 54)।
एकल-व्यक्ति कंपनी में: स्वामी उसके दायित्वों के लिए केवल कंपनी को आवंटित पूँजी की सीमा तक उत्तरदायी होता है (अनु. 85)। तथापि, वह अपनी व्यक्तिगत संपत्तियों से उत्तरदायी होगा यदि वह कपटपूर्ण रूप से इसका परिसमापन करे या असामयिक रूप से इसकी गतिविधि बंद करे, अथवा यदि यह सिद्ध हो जाए कि उसने अपने वित्त को कंपनी के वित्त से इस प्रकार अलग नहीं रखा जिससे सद्भावपूर्ण तृतीय पक्षों को हानि हो (अनु. 90)।
यह सामान्य कानूनी जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए सलाह हेतु, कुवैत में लाइसेंस प्राप्त वकील से परामर्श करें।