वयस्कता की आयु इक्कीस पूर्ण ग्रेगोरियन वर्ष है, और जो कोई इस आयु को प्राप्त कर लेता है उसे विधिक लेन-देन की पूर्ण अहलियत (कानूनी क्षमता) प्राप्त हो जाती है, जब तक कि उससे पूर्व उसकी संपत्ति पर संरक्षकता या अभिरक्षा जारी रखने का आदेश न दिया गया हो (अनु. 96)।
नाबालिग के लेन-देन विवेक-क्षमता के अनुसार भिन्न होते हैं:
- अविवेकी नाबालिग (सात वर्ष से कम): उसे कोई क्षमता नहीं होती, और उसके सभी लेन-देन शून्य (void) होते हैं (अनु. 86)।
- विवेकी नाबालिग (विवेक की आयु से वयस्कता तक): लेन-देन वैध होते हैं यदि वे विशुद्ध रूप से लाभकारी हों, शून्य होते हैं यदि विशुद्ध रूप से हानिकारक हों, और जो लाभ व हानि के बीच हों वे उसके पक्ष में प्रतिसंहरणीय (voidable) होते हैं, जब तक कि संरक्षक द्वारा या स्वयं उसके वयस्क होने के पश्चात अनुमोदित न कर दिए जाएँ (अनु. 87)।
यदि विवेकी नाबालिग अठारह वर्ष की आयु प्राप्त कर ले और उसके संरक्षक को लगे कि वह अपनी संपत्ति का प्रबंधन कर सकता है, तो उसे समस्त या उसके किसी भाग के प्रबंधन के लिए प्राधिकृत किया जा सकता है (अनु. 88); तब उसे प्राधिकरण के अंतर्गत प्रबंधन लेन-देन की क्षमता प्राप्त होती है, परंतु वह संपत्ति को एक वर्ष से अधिक के लिए पट्टे पर नहीं दे सकता (अनु. 92)। पंद्रह वर्ष की आयु प्राप्त करने पर, विवेकी नाबालिग को रोजगार अनुबंध करने और अपनी मजदूरी का निपटान करने की क्षमता प्राप्त होती है (अनु. 94)।
यह सामान्य कानूनी जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए सलाह हेतु, कुवैत में लाइसेंस प्राप्त वकील से परामर्श करें।