हिरासत का अधिकार सर्वप्रथम माँ को प्राप्त होता है, तत्पश्चात् उसकी माँ को चाहे वह कितनी भी ऊपर हो, फिर मामेरी मौसी को, फिर माँ की मामेरी मौसी को, माँ की ताऊ/चाचा की ओर से मौसी को, दादी को, पिता को, बहन को, बुआ को और इसी प्रकार अन्य को — उस क्रम में जो विधि में निर्धारित है (अनु. 189)। अभिरक्षक का वयस्क, विवेकशील, विश्वसनीय तथा बच्चे का शारीरिक और नैतिक रूप से पालन-पोषण करने में सक्षम होना आवश्यक है (अनु. 190)।
यदि माँ किसी ऐसे व्यक्ति से विवाह करती है जो बच्चे का महरम नहीं है और वह पति विवाह को परिपूर्ण (consummate) कर लेता है, तो माँ हिरासत का अधिकार खो देती है (अनु. 191)। इसके अतिरिक्त, यदि हिरासत का अधिकारी व्यक्ति विवाह की जानकारी होने के बाद एक वर्ष तक बिना किसी उचित कारण के मौन रहता है, तो यह अधिकार समाप्त हो जाता है, और इस नियम से अनभिज्ञता का दावा कोई बहाना नहीं माना जाएगा (अनु. 191)।
हिरासत का अधिकार अभित्याग (waiver) से समाप्त नहीं होता; यह केवल उसकी बाधाओं के कारण निलंबित होता है और बाधाएँ समाप्त होने पर पुनः प्राप्त हो जाता है (अनु. 193)। लड़के पर महिला की हिरासत उसके बालिग होने पर और लड़की पर उसके विवाह और उसके परिपूर्ण होने पर समाप्त होती है (अनु. 194)।
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